नाच तू बावरी,
नाच,
आज सुहागरात!
कदमों को थिरका
नाच,
ता था थैया.......
मुख से कह कि मुस्कराए
नैन से कह कि मटके
हया को कह ‘चल भाग’
घुघंरू से कह
छम छम छम बजें रातभर
परदेश से
पिया आंगन में पधारा है
उसने आदेश भिजवाया है
कोठरी में जाकर
मांग काढ़
सींक से सिंदूर भर
पूर दे...
केशों के बीच
एक सीधी लकीर
जितना दूर तक पूरेगी
उतनी लंबी होगी पिया की उमर
कोहनी तक हाथ भरके
चूड़ी पहन
कर
खन खन खन
नाक में नथ पहन,
गले में हार डाल,
कमर में करधनी बाँध
पैर व हाथ की अँगुलियों में
कस ले बिछुए-अँगूठी
पलंग पर सफ़ेद चादर बिछा
रात में जब पिया
कौमार्य भंग करेगा तेरा
चादर पर लाल धब्बा पड़ेगा
तू चीखना मत गवाँर
कदम, नैन, घूंघरू, चूड़ी, नख, होंठ
सबको कह देना
चुप्प!
बाहर आँगन में सो रहे
सास-ससुर जाग जाएँगे
वे जाग गए तो
लाल धब्बे पिया की आंखों में
समा जाएँगे
उन्हें लेकर पिया
चला जाएगा परदेश
और फिर तू रह जाएगी कोरी
इसलिए तू नाच बावरी
तुझे संतुष्ट करना है पिया को
देर मतकर
नाच!!!
नेहा नरूका
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