मंगलवार, 3 सितंबर 2019

कविता और गणित के बीच में

मुझे एक ख़ूबसूरत कविता बटे बदसूरत ज़िंदगी या एक बदसूरत कविता बटे ख़ूबसूरत ज़िंदगी में से
किसी एक को चुनना था
मैं कलाकार थी तो मैंने खूबसूरत कविता लिखना वरदान समझा
मैंने समझा मैं कोई महान कवि हूँ
इस तरह एक कविता के लिए मैंने अपना जीवन दाँव पर लगा दिया
मेरे हमउम्र समुद्र के खारे पानी का आनंद ले रहे थे
और मैं भर रही थी उस वक्त आँख में नमक
वे अपने-अपने बच्चों को चूम रहे थे
मुझे बच्चों की किलकारी में भविष्य का रुदन सुनाई दे रहा था
वे सुबह की धूप में योग कर रहे थे
मैं देख रही थी सूरज में दोपहर की आग
मुझे सपने भी आने लगे
रंगहीन-गंधहीन-भंगुर
खूबसूरत कविता के सुख से
कहीं ज्यादा कष्टकर था
इस बदसूरत ज़िंदगी को जीना
दर्शन में मैं होशियार थी
व्याकरण में औसत
पर गणित में मैं बहुत बेकार सिद्ध हो चुकी थी।

 नेहा नरूका

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