मुफ़्त प्रेम
मैंने सुना था
इस दुनिया में कुछ भी मुफ़्त में नहीं मिलता
हर मुफ़्त चीज़ की कीमत
कभी न कभी चुकानी ही होती है
इसलिए मैंने चीज़ें नहीं खरीदीं
मैंने प्रेम किया
बदले में मुझे अधिक प्रेम मिला
प्रेम में इस अधिक की क़ीमत
मुझे ज़िंदगी भर चुकानी पड़ी।
नेहा नरूका
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