पर
लोग चुपके-चुपके से मुझे खरीद लेते हैं
पहले
मैं सड़क के किनारे टाट बिछाकर मोची का काम करती थी
मेरे
पास ग्राहक आते
टूटी
चप्पलों और गंदे जूतों की मरम्मत करवाने
मैं
झुकती तो वे मेरे उभार नाप लेते
बदले
में कुछ सिक्के पकड़ाकर
वे
मुझे थोड़ा-सा खरीद ले जाते
इसी
तरह फल बेचने वाली
कोयला
चुनने वाली
फसल
काटने वाली
पेट
पालने के लिए मेहनत-मज़दूरी करने वाली औरतें भी
थोड़ा-थोड़ा
खरीदी जा रही थीं
औरतों
का घर से बाहर काम करना अपवाद है
सामान्य
नहीं
ज्यादातर
औरतें काठ की रानी बनकर घर में काम करती हैं
कभी-कभी
पूरा जीवन वे इस भ्रम में गुजार देती हैं कि उनका कोई खरीददार नहीं
जबकि
उनकी एक मामूली-सी कीमत (जैसे-रेशमी वस्त्र, आभूषण और कुछ शब्द) शुरूआत से ही तय
होती है
कुछ
मोम की रानियां हाड़-तोड़ कर काम करती हैं
फिर
भी दो वक्त की भरपेट रोटी नहीं जुटा पातीं
वे
घर में ही नर्म, स्वादिष्ट और सुन्दर गोश्त की तरह गरमा-गरम परोस दी जाती हैं
ठंडी
होकर जमने के बाद निकलती है उनके मुँह से अल्लाह के लिए बद्दुआ
मैंने
सार्वजनिक स्थानोँँ पर पुरुषोँ को बेसुध, बेख़ौफ़, बदन उघाड़े
नींद
लेते हुए देखा
मूत्र-शौच-हस्तमैथुन
करते हुए देखा
श्रम
का आनंद लेते हुए देखा
ठहाका
लगाते, गाते और झूमते हुए देखा
पर
औरतों को हमेशा इस सुख से वंचित पाया
कुछ
स्वाभिमानी औरतें ख़रीद-फरोख़्त के ख़िलाफ़ खड़ी होती हैं
ऐसी
औरतों को भी बुद्धिमान लोग टुकड़ों-टुकड़ों में खरीदने की कोशिश करते हैं
नाकामयाबी
मिलने पर उन्हें बरबरता के हवाले कर देते हैं
चूल्हे
के अविष्कार के साथ ही औरतें कांच की बोतल में बंद कर दी गईं
वे मांस
पकाकर बाहर की तरफ झांकी, तो खुद को उन्होंने मांस के लोथड़े के रूप में जाना
जो
बोतल में भरे जहरीले रसायनिक द्रव में तैर रहा था
मैंने
इस कांच को तोड़कर लंबी यात्रा पर निकलना चाहा
घोड़ा-गाड़ी को उड़ाने के फन में मैं
माहिर थी
पर
मेरी यह यात्रा रद्द कर दी गई
मुझसे
कहा गया मेरे पास लाइसेंस नहीं है।
नेहा नरूका

बहुत अच्छी कविता
जवाब देंहटाएंबहुत खूब
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